एटीएम धोखाधड़ी करने वाले और चालाक हो रहे हैं: विशेषज्ञ
एटीएम धोखाधड़ी करने वाले और चालाक हो रहे हैं: विशेषज्ञ
नई दिल्ली, सोमवार, 25 अगस्त, 2008: एटीएम के माध्यम से किए जाने वाले वित्तीय फर्जीवाड़ों को अब और अधिक परिष्कृत तरीके से संपन्न किया जा रहा है क्योंकि तकनीकी विकास और मानवी विशेषज्ञता दोनों ही मिल कर प्रचलित मुद्रा की निकासी में कुशल हो गए हैं।
फर्जीवाड़ा विरोधी विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में जहाँ प्रतिदिन अधिक संख्या में नए एटीएम खुल रहे है, वहीं विदेश में पहले से ही प्रचलित एटीएम के माध्यम से धोखाधड़ी का कारोबार अब यहां भी व्यापक मात्रा पर दिखाई दे रहा है/दृष्टिगोचर हो रहा है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ प्रवीन दलाल ने कहा, ‘एटीएम धोखाधड़ी की समस्या वैश्विक है और अब इसके अप्रत्याशित परिणाम भारत में भी दिखने लगे हैं। यह एक बड़ी चेतावनी है और इसे रोकने के लिए सभी संबद्ध लोगों को सहयोगात्मक कार्रवाई करनी होगी।'
एटीएम धोखाधड़ी तारों की टैपिंग, कार्ड के डिजिटल हस्ताक्षर को दोबारा करवाना, नकली डाटा कॉल सेंटर के माध्यम से आवश्यक निजी जानकारी प्राप्त करना, हेराफेरी के माध्यम से एटीएम स्लॉट्स से छेड़छाड़, ई-मेल अकाउंट के माध्यम से फिशिंग और एटीएम के भीतर ग्राहकों की गुप्त पिन संख्या की छिपे हुए कैमरे से चोरी आदि चीजों के माध्यम से की जाती है। एटीएम से पैसे निकालने के लिए धोखेबाज एटीएम की नकल स्किमर जैसे उपकरणों के उपयोग से करते हैं।
एक प्राइवेट फर्म इंडिया फोरेंसिक एजेंसी के प्रमुख मयूर जोशी कहते हैं, ‘एटीएम कार्ड द्वारा बैंक अकाउंट तक प्रत्यक्ष पहुंच से प्रति ग्राहक नुकसान उतना अधिक नहीं होगा, परंतु आने वाले दिनों कुल मिला कर यह बडी हानि प्रमाणित हो सकती है।" .
एटीएम धोखाधड़ी से सम्बन्धित नए और उभरते ट्रेंड में जोशी ने एक घटना बताई। ‘हाल ही में नागपुर क्षेत्र में मेरी टीम ने एक मामले की जांच की, बैक द्वारा आवेदन पत्रों की स्वीकृती के बाद लोगों को एटीएम कार्ड आधिकारिक कुरियर से उनके निवास स्थान पर भेजे गए। जोशी ने बताया, ‘विस्मयजनक तथ्य यह है कि आवेदकों से सम्बन्धित एटीएम कार्ड जिनका पता या तो मिल नहीं पाया या वे वितरण के समय उपस्थित नहीं थे, उनका कार्ड बैंक अधिकारियों ने ले निया और उसके बाद उन्होंने बैंक में जमाकर्त्ता के अकाउंट से पैसे निकाल लिए।''
‘ई-मेल, डाक या किसी को भेज कर बैंक कभी भी उपभोक्ताओं की निजी सूचना नहीं मांगते। एक नामी राष्ट्रीय बैंक के प्रवक्ता ने कहा, ग्राहकों को अपनी आईडी, क्रेडिट कार्ड संख्या और पासवर्ड लिखते समय अत्यन्त सावधानी बरतनी चाहिए।"
उन्होंने बताया कि अपनी तरफ से बैंक विभिन्न प्रकार की सुरक्षा से जुड़ी चीजें लगाकर, जैसे सीसीटीवी कैमरा या एटीएम पर संदिग्ध व्यक्ति पर नजर रखने के लिए 24 घंटे गार्ड की नियुक्ति करते हैं। एक बैंककर्मी ने बताया कि बहुत से बैंक एटीएम का प्रयोग करने में सावधानी बरतने वाले संदेश को फैलाने के लिए एटीएम के भीतर विस्तृत जानकारी और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी लगा कर रखते हैं।
दलाल ने कहा, "आईटी एक्ट, 2000 में इससे निपटने के लिए किसी विशेष प्रावधान का समावेश नहीं है और न ही इसके लिए पारंपारिक कानून आईपीसी, 1860 पर विश्वास किया जा सकता है जिससे इस समस्या से किसी तरह निपटा जा सके।'
उन्होंने कहा कि बैंकों को इस ठगी से निपटने के लिए माइक्रोचिप प्रौद्योगिकी, बॉयोमीट्रिक टोकन, एटीएम मॉनिटरिंग, आवश्यकतानुसार बने हुए सॉफ्टवेयर और ग्राहक को प्रेरित करने जैसे विकल्पों को अपनाना होगा।.
आईआईआईटी (IIIT) हैदराबाद के प्रोफेसर वैंकेया द्वारा दी गई सूचना













