ठाणे पुलिस ने वर्चुअल आतंक की पहचान की
Last Updated on:
Apr 06, 2010 07:11 PM
ठाणे पुलिस ने हाल ही में शहर में वाई-फाई नेटवर्क की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है। गुजरात और दिल्ली में हुए बम विस्फोटों से पहले मुम्बई और नवी मुम्बई से आतंकवादियों ने इस नेटवर्क को हैक कर इसका उपयोग मेल भेजने के लिए किया था।
ठाणे पुलिस की साइबर अपराध शाखा और नैसकॉम दोनों ने संयुक्त रूप से 18 सितम्बर से 20 सितम्बर तक साइबर सेफ ठाणे -2008 के नाम से आम जनता के लिए तीन दिवसीय जागरूकता अभियान आयोजित किया।
ठाणे की साइबर अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त विक्रम देशमाने ने कहा, ‘वाई-फाई नेटवर्क को हैक कर उसका प्रयोग किए जाने के कारण हम इस तरह के नेटवर्क की सुरक्षा के बारे में लोगों को शिक्षित करना चाहते हैं।' उन्होंने कहा कि शाखा शहर के भीतर वाई-फाई नेटवर्क का प्रयोग करने वालों सर्वेक्षण करेगी और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए इस डाटाबेस को शहर की पुलिस को उपलब्ध कराएगी।
2005 में इसके आरंभ होने के बाद ही ठाणे पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने नैसकॉम के सहयोग से काम किया है और साइबर अपराध के बहुत से मामलों को सुलझाया है।
ठाणे के संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) प्रशांत बुर्डे ने कहा, ‘इस कार्यक्रम का उद्देश्य इंटरनेट का, खासकर वाई-फाई नेटवर्क का प्रयोग करने वाले लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना है।‘बुर्डे ने आगे कहा, ‘इंटरनेट का प्रयोग करने वाले लोगों को शिक्षित करना ठाणे पुलिस द्वारा इस माध्यम के अच्छी तरह से प्रयोग करने के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाने के प्रयासों का ही विस्तार है।
कुछ समय पहले, ही ठाणे पुलिस ने साइबर कैफे में नेट का उपयोग करने के दौरान वैध पहचान पत्र रखने की घोषणा जारी की थी। बुर्डे ने कहा,‘यह निर्णय यह सुनिश्चित करने के लिए था ताकि कोई असामाजिक तत्व साइबर कैफे का उपयोग कर गलत कामों को अंजाम न दे पाए। इन तीन दिनों के अभियान में विभिन्न तरह के कार्यक्रम जैसे सेमिनार, पैनल परिचर्चा और साइबर सुरक्षा पर भाषणों का आयोजन किया गया।
देशमुख ने कहा, ''ज्यादा से ज्यादा लोग और कंपनियां अपने व्यवसाय या अन्य उद्देश्यों के लिए वाई-फाई नेटवर्क का इस्तेमाल कर रही हैं, ऐसे में उन्हें इसके बारे में अच्छी तरह जान लेना चाहिए।''
Ref:http://www.dnaindia.com/report.asp?newsid=1190867
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