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सूक्ष्‍म परीक्षण के तहत वाई-फाई नेटवर्क

Last Updated on: Apr 06, 2010 07:11 PM

हाल ही में बड़े शहरों मे हुए बम धमाकों की जांच वाई-फाई नेटवर्क की सुरक्षा को केन्‍द्र में लाई है। हालांकि शहर में नेटवर्क बनाने के प्रयास किए जा रहे है, परंतु निर्णायकों के पुणे में न रहने के कारण इसका क्रियान्वयन नहीं किया जा सका।

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने (भारतीय टेलिकॉम नियामक प्राधिकरण) सरकार से इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडरों/प्रदाताओं से अपने उपभोक्‍ताओं को सुरक्षा संबंधी मामलों के बारे में शिक्षित करने के लिए कहा है। पुणे का मामला बिल्‍कुल ही अलग प्रकार का है जहाँ वाई-फाई बिना किसी शुल्‍क या पासवर्ड के उपलब्‍ध है। पुणे नगर निगम माइक्रोसेंस कंपनी के साथ मिलकर वायरलैस फिडिलिटी सेवा उपलब्‍ध करवा रहा है। आईएसपी और उपभोक्‍ताओं के मामले की उपेक्षा इन कम्‍प्‍यूटर्स को जोखिम में डाल रही है।

पुणे नगर निगम के मुख्‍य सूचना अधिकारी अनुपम सराफ ने कहा, ‘सबके लिए वाई-फाई की उपलब्‍धता दिल्‍ली, बेंगलुरु जैसे अन्‍य शहरों में भी उपलब्‍ध करवाई जा रही है। हमने माइक्रोसेंस के सामने प्रस्‍ताव रखा था कि सिटिजन्‍स फेसिलिटेशन कियोस्‍कस् को समाविष्‍ट करनेवाली यंत्रणा की व्‍यवस्‍था की जानी चाहिए। किसी भी वाई-फाई प्रयोक्‍ता को नेटवर्क तक पहुंचने के लिए इन्‍हीं कियोस्‍कस् से यूजर नेम और पासवर्ड मिलना चाहिए, लेकिन कंपनी के नीति निर्माता चेन्‍नई में बैठते हैं और पुणे में केवल इंजीनियर हैं। इसलिए यह प्रस्‍ताव लागू नहीं हो सका। वास्‍तव में, हम पुणे को सबसे सुरक्षित शहर बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

कंपनी के द्वारा बिजनेस मॉडल बनाने में हुए विलंब ने वाई-फाई नेटवर्क के व्‍यवसायिक परिचालन में भी विलंबित कर दिया है। यह नेटवर्क अधिक समय तक इसे निशुल्‍क होने से रोकता, परंतु आईएसपी कंपनी इसे चलाने के लिए बिजनेस मॉडल बनाने में विफल हो गई।

मेहरत्‍ता चेंबर ऑफ कॉमर्स इं‍डस्‍ट्रीज एंड एग्रीकल्‍चर के आईटी सबकमेटी के चेयरमन दीपक शिकरपुर ने कहा, ‘यह आतंकवादियों और अपराधियों द्वारा मासूम लोगों के वाई-फाई कनेक्‍शन को हैक किए जाने के कारण बड़ा मुद्दा बन गया है। रूटर्स और फायरवॉल से जुड़े मुद्दों को वाई-फाई सिस्‍टम का प्रयोग करने से पहले समझना आवश्‍यक होगा।

उन्‍होंने कहा,‘ यदि आप अपने घर या ऑफिस में इंटरनेट तक पहुंच के लिए वायरलैस रूटर का प्रयोग करते हैं, तो रूटर का वायरलैस सिग्‍नल 60 से 70 फीट तक बिना किसी समस्‍या के काम करता है और इस रेंज के भीतर कोई भी व्‍यक्ति वायरलैस रूटर से जुड़ सकता है और आपके इंटरनेट कनेक्‍शन का प्रयोग कर सकता है।

शिकरपुर और सराफ दोनों ने ही आईएसपी के बारे में सुरक्षा की अपने उपभोक्‍ताओं को शिक्षित करने की ट्राई (TRAI) की इस पहल का स्‍वागत किया है।

सुरक्षित कनेक्‍शन के लिए
  • इंटरनेट से जुड़ने के लिए प्रयोग में लाए जानेवाले पासवर्ड सभी कम्‍प्‍यूटर्स की सुरक्षा करते है। आईएसपी की सेवा या रूटर इंस्‍टॉल का इस्‍तेमाल करें जो यह सुनिश्चित करता हो कि निशुल्‍क वाई-फाई डिसेबल्‍ड हों।
  • एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर इंस्‍टॉल करें और इसे अपडेट/अद्यतनित रखें।
  • पर्सनल फायरवाल सॉफ्टवेयर भी इंस्‍टॉल करें।
  • कुछ एप्‍लीकेशंस आपकी अनुमति या आपकी जानकारी के बिना फाइल शेयरिंग कर सकते हैं, इसलिए फाइल शेयरिंग (पीयर-टू-पीयर) को डिसेबल कर दें।

सुरक्षा के लिए कुछ संकेत

  • कुछ वायरलैस उत्‍पादों, जैसे एक्‍सेस प्‍वाइंट आदि में फैक्‍टरी द्वारा सेट किया हुआ डिफॉल्‍ट पासवर्ड होता है। हैकर्स इन पासवर्ड को जान सकते हैं और आपके वायरलैस यंत्र तक पहुंच कर इसका प्रयोग करने और इसकी नेटवर्क सैटिंग बदलने का प्रयास कर सकते हैं। किसी भी अनधिकृत बदलाव को रोकने के लिए अपना रूटर पासवर्ड बदलें।
  • वायरलैस एमएसी फिल्टिरिंग को सक्षम करें: वायरलैस रूटर तक पहुंच सकने वाले भौतिक यंत्र की संख्‍याओं को प्रतिबंधित करें। ऐसा करने के लिए निम्‍नलिखित चरणों का अनुसरण करें।
  • अपने एसएसआईडी (SSID) का प्रसारण न करें: अनधिकृत उपयोगकर्ता से: अपने एसएसआईडी (SSID) को बचा कर रखें। (आपका नेटवर्क नाम)।
  • एनक्रिप्‍शन/पासवर्ड को सक्षम कर अपने वाई-फाई नेटवर्क की रक्षा करें।
  • एनक्रिप्‍शन वायरलैस नेटवर्क पर डाटा के प्रसारण की सुरक्षा करता है और वाई-फाई पहुंच को सुरक्षित करता है।
Ref: http://blogs.lemagit.fr/2008/10/10/wi-fi-networks-under-scrutiny/
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